Tuesday, 29 September 2015

हे प्रभु, मेरे मन से

हे प्रभु, मेरे मन से
...आनन्द विश्वास
हे प्रभु
मेरे मन से
मैं को निकाल दे।
जब तू ही
यत्र,
तत्र
और
सर्वत्र है
तब क्यों न
तू
ही मेरे मन में
सदैव निवास कर।
...आनन्द विश्वास
...आनन्द विश्वास

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 1 - 10 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2115 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. चर्चा मंच के सभी चर्चाकार मित्र बन्धुओं को
    सहकार और सहयोग के लिए धन्यवाद।
    ....आनन्द विश्वास

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति

    ReplyDelete