Thursday, 27 February 2014

*आई रेल, आई रेल.*

*आई रेल,आई रेल*
बंटी   बबलू  खेल   रहे  थे,
कुर्सी    आगे   ठेल  रहे  थे।
तभी   दौड़ती  पिंकी  आई,
और  साथ  में  टॉफी  लाई।
बोली - आओ,  खेलें   खेल,
आई    रेल,   आई     रेल।
बबली  लाई   झंडी  घर  से,
स्वीटी  लाई  सीटी  घर  से।
बंटी   लाई  घर  से   धागा,
टौमी   को  कुर्सी  से  बांधा।
शुरू  हुआ  बच्चों  का  खेल,
आई    रेल ,   आई    रेल।
तभी पास  का  कुत्ता आया,
टौमी   को   देखागुर्राया।
दौनों  कुत्ते   लड़े   पड़े   थे,
बंटी  बबलू   गिरे   पड़े  थे। 
लगी  चोट, पर  भाया खेल,
आई     रेल ,   आई    रेल।

......आनन्द विश्वास 






4 comments:

  1. मंगलवार 04/03/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी एक नज़र देखें
    धन्यवाद .... आभार ....

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  2. एक निवेदन
    कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।

    इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।

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    अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-

    http://www.youtube.com/watch?v=VPb9XTuompc

    धन्यवाद!

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  3. बाल साहित्य को समर्पित है आपका ब्लॉग...बहुत सुंदर और सरल बाल कविता...बचपन की याद ताज़ा हो गई...

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