Tuesday, 11 August 2015

Bahadur Beti (बहादुर बेटी)

Bahadur Beti
*बहादुर बेटी*
(बाल-उपन्यास)
कहानी
है
बहादुर बेटी
आरती
की
→ जिसने पीएम के ड्रीमलाइनर विमान को आतंकवादियों के चंगुल से मुक्त कराया।
→ जिसने तीन-तीन खूँख्वार आतंकवादियों को बेहोश कर सरकार के हवाले कर दिया।
→ जिसने घाटी में से आतंकवादियों और उनके आतंकी अड्डे को तहस-नहस कर डाला।
→ जिसने पुस्तक और पैन को घर-घर तक पहुँचाकर घाटी में विकास की नई गाथा लिख दी।
→ जिसने घाटी के रैड ब्लड ज़ोन का विकास कर देशी और विदेशी इन्वैस्टर्स के लिए रैड कॉर्पेटस् बिछवा दिए।
→ जिसकी बदौलत एके-47 थामने वाले सशक्त युवा हाथों में आज ऐंड्रोंयड-वन आ गए।
→ जिसकी बदौलत रायफल्स की ट्रिगर पर घूमने वाली सशक्त युवा-हाथों की अंगुलियाँ अब कॉम्प्यूटर और लैपटॉप के की-बोर्ड के साथ खेलने लगीं।
→ जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर अनेक चैरिटी-शो करके स्लम-एरिया में रहने वाले गरीब और अनाथ बच्चों के लिए फ्री-रेज़ीडेन्शियल स्कूल खोले।
→ जिसने अपने स्कूल का उद्घाटन पीएम श्री से करवाया और जिससे प्रेरणा लेकर स्वयं पीएम श्री ने भी हर स्टेट में इसी प्रकार के फ्री-रेज़ीडेन्शियल स्कूल खुलवाए।
→ जिसने बेटी पढ़ाओ और देश बढ़ाओ के आन्दोलन को गतिशील बनाया। उसने कहा... 
बेटा  शिक्षित, आधी शिक्षा,
बेटी  शिक्षित, पूरी  शिक्षा।
→ जिसने बेटी के शिक्षा और सुरक्षा के अभियान को घर-घर तक पहुँचाकर सशक्त बनाया। उसने कहा...
हार  जाओ  भले, हार मानो  नहीं।
तन से हारो भले, मन से हारो नहीं।
→ तभी तो प्रेस और मीडिया की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश की बहादुर बेटी आरती बोल रही थी और पीएम का मन पिघल रहा था।
→ विशाल देश के सशक्त पीएम की आँखों में पहली बार आँसू देखे गए। उन्हें रह-रह कर बस, यही ख्याल आ रहा था कि देश के बच्चे जिस काम को करने का अपना मन बना सकते हैं और कुछ करने का बीड़ा उठा सकते हैं तो हम इतनी बड़ी सत्ता और सामर्थ्य के होते हुए भी, उन स्लम-एरिया में रहने वाले गरीब बच्चों के उत्थान के विषय में, क्या सोच भी नहीं सकते।
→ और जबकि मैं भी तो उन्हीं बच्चों में से एक बच्चा हूँ जिसने अपने संघर्ष-मय जीवन की शुरुआत ही, स्लम-एरिया की उस छोटी-सी झोंपड़ी से की थी। वह भी तो कभी स्लम-एरिया में रहकर ही अपनी गुजर-बसर किया करता था और लैम्प-पोस्ट के नीचे टाट के बोरे पर बैठकर गणित के सवाल किया करता था।
→ कैसे भूल सकता हूँ मैं अपनी जिन्दगी के वे गर्दिश के दिन, जब मैं खुद किसी सेठ की एक छोटी-सी दुकान पर काम किया करता था।
→ गरीबी की सौनी-गंध तो आज भी उनके मन-मस्तिष्क पर अटी पड़ी थी।
→ बाल-उपन्यास की हर घटना अपने आप में रोचक बन पड़ी है जो पाठक-गण को चिन्तन, मनन और सोचने के लिये विवश करेगी।
-आनन्द विश्वास
सी-85, ईस्ट एण्ड एपार्टमेंटस्
न्यू अशोक नगर मैट्रो स्टेशन के पास
मयूर विहार फेज़-1 (एक्टेंशन)
नई दिल्ली- 110 096
मो. 09898529244, 7042859040
विशेषः- बाल-उपन्यास उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ से प्रकाशित किया गया है और विक्रय के लिए उपलब्ध है। जिसकी पृष्ठ संख्या-152 और मूल्य-150/- है।
उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ
142, शाक्य पुरी, कंकरखेड़ा
मेरठ कैन्ट-250 001
फोनः 0121-2632902, 09897713037
ई मेलः uttkarshprakashan@gmail.com.
-आनन्द विश्वास

Sunday, 9 August 2015

एप्पल में गुण एक हजार

एप्पल में गुण एक हजार
...आनन्द विश्वास

एप्पल  में   गुण   एक  हजार,
एप्पल  खाओ  हर दिन  चार।
नित्य नियम  से जो  खाता है,
हृष्ट-पुष्ट   वह   हो  जाता  है।

एप्पल  का  भैया क्या कहना,
सुन्दरता   का  ये  है   गहना।
चेहरा  दमके  हर  दम  लाल,
एप्पल  करता  बड़ा  कमाल।

वात-पित्त-कफ़ दोष विनाशक,
सभी फलों का एप्पल  शासक।
कब्ज,  दस्त,  सरदर्द  मिटाए,
खांसी   सर्दी   पास  न  आए।

बीपी   का   अक्सीर  इलाज,
बात  पते  की   कहता  आज।
आधि-व्याधि सब दूर भगाता,
डॉक्टर पास  फटक ना पाता।

सब  रोगों   की  एक  दवा है,
खाया  एप्पल, रोग  हवा  है।
डॉक्टर  भी  अक्सर  कहते हैं,
वे  भी  ज्यूस  पिया  करते हैं।

छिलका सहित चबाकर खाओ,
मन  भाए  तो  ज्यूस  बनाओ।
एप्पल  ज्यूस बगल का तोशा,
मंज़िल  का  है   पूर्ण  भरोसा।
...आनन्द विश्वास

चित्र गूगल से साभार

Friday, 7 August 2015

केला खाओ, हैल्थ बनाओ

केला खाओ, हैल्थ बनाओ
...आनन्द विश्वास

सबसे  सस्ता, सबसे  अच्छा,
केला  खाओ, हैल्थ  बनाओ।
नहीं   अकेले,  नहीं  अकेला,
दो-दो  खाओ और खिलाओ।
एक  इलायची, दो-दो  केले,
खुद भी खाओ और खिलाओ।
खुद खाने  से शक्ति  मिलेगी,
और खिलाकर पुण्य कमाओ।
केला  नहीं   अकेला   होता,
इसकी अतुलित शक्ति पाओ।
शहद दूध  के संग  में खाओ,
और  बोन्स  स्ट्रोंग  बनाओ।
कच्चा  केला  बड़ा  निराला,
इसकी  सब्जी रोज बनाओ।
केला  खान  गुणों  की भैया,
बीमारी  को   दूर   भगाओ।

...आनन्द विश्वास

Thursday, 30 July 2015

*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)

*बहादुर बेटी*
(बाल-उपन्यास)


समर्पित
है
देश की उन सभी बहादुर बेटियों
के
बुलन्द हौंसलों को,
जो
देश और समाज के लिए
कुछ करने का अपना
फौलादी मन
बना चुकीं
हैं।

...आनन्द विश्वास

Thursday, 23 July 2015

मेरे पापा सबसे अच्छे

मेरे पापा सबसे अच्छे
...आनन्द विश्वास
मेरे   पापा    सबसे   अच्छे,
मेरे   संग   बन   जाते  बच्चे।
झटपट  वो  घोड़ा  बन जाते,
और  पींठ  पर  मुझे बिठाते।

पूँछ हिलाते  हिन-हिन करते,
धमा  चौकड़ी  भरते  फिरते।
और  गुँलाटी  फिर  वो भरते,
टप-टप, टप-टप बोला करते।

थककर  कहते   भूखा  घोड़ा,
माँग   रहा   है  ब्रेड-पकोड़ा।
चाय   और   पकोड़ा   लाओ,
अब  घोड़े  की  भूख मिटाओ।

मेरी  प्यारी   बिटिया  रानी,
प्यासा  घोड़ा   लाओ  पानी।
जल्दी   से   मैं  पानी  लाती,
अपने  हाथों  उन्हें  पिलाती।

कितनी सुन्दर गुड़िया ला दी,
उपहारों  की  झड़ी  लगा दी।
जब  गुड़िया  का  पेट दबाती,
गाती,  हँसती   और  हँसाती।

कभी   पैर  पर  मुझे  झुलाते,
झू-झू   मामू    गाना    गाते।
ढब-ढब  करके   छान  उठाते,
ऊँचा   करते   और   गिराते।

पापा  फिर  से  छान उठाओ,
मुझे  उठाओ   और  गिराओ।
गिरना  पड़ना मुझको भाता,
पापा  के  संग खेल  सुहाता।

खाना  अपने   संग  खिलाते,
और  कहानी   रोज़  सुनाते।
लोट-पोट  मैं   हो  जाती  हूँ,
थक कर फिर मैं सो जाती हूँ।










...आनन्द विश्वास

Monday, 20 July 2015

मेरे जन्म दिवस पर मुझको

मेरे जन्म दिवस पर मुझको
...आनन्द विश्वास
मेरे जन्म दिवस पर मुझको, पापा ने उपहार दिया है।
सुन्दर पुस्तक *देवम* दी है,पढ़ने वाला प्यार दिया है।
पुस्तक  में  बालक  देवम  ने,
आतंकी   को  मार  गिराया।
बेटा    बेटी     सभी    पढ़ेंगे,
का सुन्दर अभियान चलाया।
सभी  पढ़ेंगे,  सभी  बढ़ेंगे, नारे  को  साकार किया है।
मेरे जन्म दिवस पर मुझको, पापा ने उपहार दिया है।
वृद्धाश्रम  में  विधवा  माँ को,
उसको उसका घर दिलवाया।
उसका   बेटा  बड़ा  दुष्ट   था,
उसे  जेल   में   बन्द  कराया।
वृद्धजनों की सेवा करना, हमें सिखा उपकार किया है।
मेरे जन्म दिवस पर मुझको, पापा ने उपहार दिया है।
इस पुस्तक  में एक  बात जो,
सबसे  ज्यादा  मुझको  भाई।
देवम ने  भी जन्म दिवस पर,
सबको  पुस्तक   ही  बँटवाई।
और साथ में  पेन बाँट कर, कैसा उच्च विचार दिया है।
मेरे जन्म दिवस पर मुझको, पापा ने उपहार दिया है।
अच्छी  पुस्तक  सच्चा  साथी,
हर कर तक पुस्तक पहुँचाऐं।
अच्छी  पुस्तक  पढ़  लेने की,
सब के मन में  ललक जगाऐं।
सबको पुस्तक सबको शिक्षा, उत्तम मंत्रोच्चार किया है।
मेरे जन्म दिवस पर मुझको, पापा ने उपहार दिया है।
...आनन्द विश्वास