Saturday, 18 July 2015

मेरा गुड्डा मस्त कलन्दर

मेरा गुड्डा मस्त कलन्दर
...आनन्द विश्वास 

मेरा    गुड्डा   मस्त  कलन्दर,
नाचे    ऐसे     जैसे    बन्दर।
उछल  कूद  में  ऐसा  माहिर,
शैतानी  उसकी  जग जाहिर।

एक  बार बस  चाबी  भर दो,
फिर उसको धरती पर धर दो।
ऊपर   नीचे,   नीचे   ऊपर,
कभी नाचता सिर नीचे कर।

कभी  हाथ  से  पैर  पकड़ता,
कभी  पैर पर नाक  रगड़ता।
पैरों  को सिर  पर  रख देता,
और  हाथ के  बल चल लेता।

प्यारा  गुड्डा   करतब  करता,
तरह-तरह की हरकत करता।
कसरत  करता  दण्ड  पेलता,
हमें  खिलाता  और   खेलता।

त्राटक  करता,  योगा  करता,
और  बहुत  से  आसन करता।
हरकत वह तब तक ही करता,
जब तक चाबी का दम रहता।

और बाद  में  शव-आसन  कर,
शान्त  लेट  जाता  है  भू  पर।
जब-जब भी  मैं  चाबी भरता,
धमा-चौकड़ी  तब  ही करता।


...आनन्द विश्वास

Tuesday, 14 July 2015

मेरी गुड़िया छैल-छबीली

मेरी गुड़िया छैल-छबीली
आनन्द विश्वास

मेरी    गुड़िया   छैल-छबीली,
जींस  पहनती   गहरी  नीली।
इलू-इलू   बोले  वह   सबको,
प्यार  बाँटती  सारे  जग को।

काला  चश्मा,  लाल  रुमाल,
और   सुनहरे   सुन्दर   बाल।
जैकिट  है  फर  वाला  लाल,
शूज़  पहन  कर  करे कमाल।

आँखें   उसकी   नीली- नीली,
और   टॉप  है   हल्की  पीली।
कभी  खोलती   आँखें  अपनी,
और  कभी  ढक  लेती  ढपनी।

मटक-मटक कर आँख दिखाती,
और   कभी   आँखें   मटकाती।
ठुमक-ठुमक कर नाँच दिखाती,
सबके  मन को  बड़ा  लुभाती।

जब   मैं  उसका पेट  दबाती,
सुन्दर-सुन्दर   गाने    गाती।
मुझको  प्यारी  मेरी  गुड़िया,
मैं  पापा  की  प्यारी गुड़िया।

गुड़िया मुझको प्यारी लगती,
मै  पापा  को  प्यारी लगती।
प्यारा-प्यारा जग  से न्यारा,
सुखमय  है   संसार  हमारा। 

...आनन्द विश्वास

चित्र गूगल से साभार

Friday, 10 July 2015

ऊपर वाले बहुत बधाई

ऊपर वाले बहुत बधाई
...आनन्द विश्वास
ऊपर  वाले  बहुत  बधाई,
जो  तूने  बारिश  करवाई।
कितने दिन से तरस रहे थे,
पल-पल कैसे उमस भरे थे।
उफ़ गर्मी,क्या गर्मी थी वो,
सूरज की  हठधर्मी  थी वो।
अब लोगों  ने  राहत पाई,
ऊपर  वाले  बहुत  बधाई।
पानी  बरसा, मनवा हरसा,
प्यासा जन था सूखे मरु सा।
प्यासा मन अब डोल रहा है,
मेघों की  जय  बोल रहा है।
दादुर  ने  भी  टेर  लगाई,
ऊपर  वाले  बहुत  बधाई।
अब  किसान  के वारे-न्यारे,
कब से वह  आकाश निहारे।
खुशहाली का हल ही हल है,
रोटी-रोज़ी  का  सम्बल  है।
खेतों   में   खेती   लहराई,
ऊपर  वाले   बहुत  बधाई।
नभ में  पक्षी  चहक रहे  हैं,
फूल, बाग में महक रहे  हैं।
पेड़ों   पर   झूले   ही  झूले,
बच्चे   खुश  हो  झूला  झूले।
अमवा  की डाली  मुस्काई,
ऊपर   वाले  बहुत  बधाई।

              ...आनन्द विश्वास

Wednesday, 8 July 2015

सुबह सबेरे त्राटक योगा

सुबह सबेरे त्राटक योगा
...आनन्द विश्वास 

सुबह   सबेरे  त्राटक  योगा,
सुन्दर तन-मन, भागें रोगा।
हल्की  जौगिंग जो  हो जाए,
सारा दिन मंगल-मय  होगा।

दादा जी  अक्सर  कहते  हैं,
योगा  को  अपनाना  होगा।
एक बार जो कर  ले योगा,
देखो, फिर कैसा मन होगा।

योगा  करने  वाला हर जन,
चुस्ती  फुर्ती   वाला  होगा।
आसन से शासन हो मन पर,
चंचल मन भी वश में होगा।

विश्वशान्ति का हल है योगा,
आत्मशक्ति  सम्बल है योगा।
जन-जन के मन में बस जाए,
तभी सुनहरा जन-गण होगा।

...आनन्द विश्वास

Monday, 22 June 2015

आओ, चन्दा मामा आओ

आओ, चन्दा मामा आओ
...आनन्द विश्वास
आओ  चन्दा  मामा  आओ,
एक बार तो घर पर आओ।
नानी वाली कथा  कहानी,
हमें  बताओ, हमें  सुनाओ।

बापू  का  चरखा  तो  देखा,
नानी का चरखा दिखलाओ।
कैसे   सूत  काततीं   नानी,
कते सूत का, झबला लाओ।

क्या खाते हो, क्या पीते हो,
हम बच्चों  को जरा  बताओ।
कभी किसी दिन साथ हमारे,
पीज़ा   खाओ,  बर्गर  खाओ।

अपने साथी  तारा-गण को,
एक बार तो, यहाँ  घुमाओ।
केवल रात तुम्हें क्यों भाती,
इसका  कारण  हमें बताओ।

या  फिर  रूँठ  गऐ  हो  हमसे,
मन भी जाओ, मान भी जाओ।
मम्मी हर दिन तुम्हें निहारे,
इस राखी पर आ भी जाओ। 

...आनन्द विश्वास

Thursday, 11 June 2015

"गरमागरम समोसे खाओ"

आओ बाबू, लाला आओ,
गरमागरम  समोसे   खाओ।
काजू किसमिश, मेवे वाला,
धनियाँ मटर  पुदीना डाला।
आलू  इसमें शिमले वाला,
डाला इसमें  गरम मसाला।
मीठी  चटनी  डली  हुई  है,
तीखी  मिर्ची  तली  हुई  है।
मस्त  कचौड़ी  काँदे  वाली,
खस्ता  और मसाले  वाली।
देशी घी  की आलू टिकिया,
मन भाए तो खाना बिटिया।
छोले    और  भटूरे   खाओ,
बड़ा-पॉव  है  खाते  जाओ।
और  जलेबी  गरम-गरम  है,
इसके  आगे  सभी  नरम  है।
इसे  दूध  में   डालो, खाओ,
चटकारे  भी   भरते  जाओ।
दही बड़े  खुद  आकर  देखो,
मन भाए  तो  खाकर  देखो।
देखो, इसकी  लाइन बड़ी है,
सारी  पब्लिक वहीं खड़ी है।
चटनी - पूरी,    पानी - पूरी,
बिन इसके  तो चाँट अधूरी।
आओ,अब कुछ ठंडा लेलें,
पंजाबी  लस्सी   को  बोलें।
या  ठंडी  कुल्फी  अजमाऐं,
और  बरफ  के  गोले खाऐं।
पेट आपका  जब  भर जाए,
नींबू  शर्बत  साथ  निभाए।
इडली,  ढोसा, पीज़ा, बर्गर,
पैक करा लो खाना घर पर।
-आनन्द विश्वास

Tuesday, 21 April 2015

"बेटा-बेटी सभी पढ़ेंगे"


नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग     में    बेटा-बेटी,
सभी   पढ़ेंगे,  सभी  बढ़ेंगे।
फौलादी    ले   नेक  इरादे,
खुद अपना इतिहास गढ़ेंगे।
देश  पढ़ेगा, देश  बढ़ेगा, दौड़ेगी अब, तरुण जवानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटा  शिक्षित, आधी शिक्षा,
बेटी   शिक्षित  पूरी  शिक्षा।
हमने सोचा, मनन करो तुम,
सोचो समझो  करो समीक्षा।
सारा जग शिक्षामय करना, हमने सोचा मन में ठानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
अब कोई ना अनपढ़ होगा,
सबके  हाथों पुस्तक होगी।
ज्ञान-गंग  की पावन धारा,
सबके आँगन तक पहुँचेगी।
पुस्तक और पैन की शक्ति,जगजाहिर जानी पहचानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ  लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग   सम्मान-पर्व  है,
ज्ञान-पर्व  है,  दान-पर्व है।
सब सबका सम्मान करे तो,
जीवन  का  उत्थान-पर्व है।
सोने की  चिड़िया बोली है, बेटी-युग की हवा सुहानी।
बेटी-युग के नए दौर की,आओ लिख लें नई कहानी।
-आनन्द विश्वास